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KBC में लगा दीपावली अनूठा मेला

दिपावली हर्षेाल्लास का त्येाहार है। ख्ुाश्यिो का त्येाहार हैं और रोश्नी का त्येाहार है। इसलिये इस त्येाहार को कुछ अलग ढंग से मनाने का हक तो बनता है। हर त्येाहार की तरह इस त्येाहार को भी केबिसी ने एक अलग अंदाज मंे मनाया। दिपावली के अवसर पर कल 18 अक्टुबर की शाम को केबिसी कार्यालय में एक दिवाली मेले का आयोजन कीया गया। यह दिवाली मेला अपने आप में एक अनुठा मेला था । इस मेले में हर वह कुछ था जो आज के युग में मनोरंजन के लिये लेागो की अवश्यकता हैं। कलरफुल और चकाचैंध कर देने वाले रंग बिंरगी रोश्नी लोगोे के मन को काफी लुभा रही थी। संगित लहरीयो पर कलाकारो द्वारा प्रस्तुत गितो ने भी वहां मौजुद लेागो

केले के पेड़ों पर सजी है दीप मालाओ ने शहर में शोभा में लगाये चार चाँद

दिवाली का अवसर हो और केलो के पेड़ो से घर और प्रतिष्ठानो को नही सजाया गया हो ऐसा तो हो नही सकता। पुरे शहर के प्रमुख बाजारो में सभी व्यवसायिक प्रतिष्ठानो के सामने केले के पेड़ सजाये गये है। इन केलो के पेड़ो पर सजी दिप मालाये बडी ही सुंदर लग रही है। केलो के पेड़ो को भी रंगबिरंगी फुलो से सजाया गया है। व्यवासयिक प्रतिष्ठानो में भी तरह तरह के फुल प्रतिष्ठानो की सुंदरता में चार चांद लगा रहे है। कइ प्रतिष्ठानो में बजता तेज संगित पटाखो की शोर के बाद घुलमिल कर वातावरण में और भी उत्साह पैदा कर रहा है।

मध्य रात्री 12 बजे से महाकाली की उपासना प्रारंभ

आज दिपावली की मध्य रात्री को ठिक 12 बजे माता काली की पुजा प्रारंभ हो गइ। आमतौर पर दिवाली के मध्य रात्री को ही अमाव्सया के दिन माता काली की पुजा करने का विधान है। आज की रात माता काली के सभी भक्त बडे ही विधि विधान के साथ माता काली की पुजा कर रहे है। माता काली की पुजा करने के कइ नियम है जो काफी कठिन है। माता काली की पुजा पुरे नियमो एंव विधिी विधान के साथ ही करनी होती है। यह पुजा कइ घंटो तक चलती है। माता काली के उपासक रातभर मां काली की उपासना करते है। मां काली के पुजा के साथ ही काली पुजा पंडाल के पठ भी आम लेागो के दर्शन के लिये खोल दिये जाते है इसलिये आप कल 20 अक्टुबर से शहर में बने इन भव्य प

दीपावली के दिन भी शहर में जगह जगह लगा है गंदगी का अंबार

दिवाली सदियो से ही साफ सफाइ का त्योहार माना जाता है। एक तो साफ सफाइ का त्योहार दिपावली और दुसरी ओर प्रधानमंत्री का स्वच्छता अभियान। इन दोनो ही चिजो को शर्मसार कर रहे है शहर में लगे यह कुड़े के अंबार। शहर में कइ प्रमुख स्थानो पर यह बडे बडे कुडो के अंबार दिपावली के इस पावन त्योहार को खुलेआम चिढा रहे है। लेाग दिपावली साफ सफाइ के साथ मनाये या इन कुडो के अंबारो के बिच यही सवाल आज कटिहार के लेागे के जेहन में घुम रहा है। कटिहार नगर निगम पर शहर साफ सफाइ का जिम्मा है। अन्य दिनो की बात तो आप छोड दिजिये जब दिपावली के हि दिन लोगो का इन कुड़ो के अंबार से पिछा नही छुटेगा तो भला लोगो का विश्वास नगर निगम पर

बड़ी धूम धाम के साथ मनाया जा रहा है दीपों का त्यौहार दिवाली

आज दिपावली है। रोश्नी और प्रकास का त्येाहार। दिपो का त्योहार। आज दिपावली के दिन शाम को पुरा शहर दुल्हन की तरह सजा हुआ नजर आ रहा है। चारो आर जगमगाते दिये और रंगबिरंगी बिजली के बल्ब शहर की सुंदरता में चार चांद लगा रहे है। सभी लेागो ने अपने अपने घरांे एंव प्रतिष्ठानो को बडे ही सुंदर ढंग से सजाया और संवारा हैै। ऐसा लग रहा है मानो सक्षात लक्ष्मी स्वंय भगवान विष्णु के साथ धरती पर उतर आइ हो। एक अेार दुल्हन की तरह पुरा शहर और दुसरी ओर वातावरण में गुजंती पटाखो की आवाज लोगो का उत्साह और भी दुगुना कर रही है।दिपावली को लेकर आज सुबह से ही पुरा शहर हर्षेल्लास में डुबा हुआ नजर आ रहा था । हर घर हर प्रतिष

दीपावली के दिन घरों के आगे रंग बिरंगी लगने की भी है परम्परा

यह है कंडेल, ख्ुाबसुरत कंडेल रंग बिंरगी कागज से बनी यह सुदंर कंडेल आज सभी के घरो के शोभा बने हुए हैं। ऐसा माना जाता है की इन कंडेलो से निकलने वाली रोश्नी भगवान विष्णु एंव माता लक्ष्मी को सीधे अपनी ओर आकर्षित करती है। घरो के आगे कंडेल टंागने की पंरपरा शदियो से चली आ रही है। आज के कृत्रिम बल्बो के जमाने में हांलाकी इन कंडेलो का मिलना थोरा कम हो गया है इसके बावजुद आज भी कइ स्थानो पर लेाग इन कंडेलो को बनाकर बेचते है और इससे अपनी अजिविका भी चलाते है। पुराने जमाने में इन कंडेलो के ंअंदर दिये जलाकर रोश्नी की जाती थी लेकिन अजकल इन दियो का स्थान बिजली के बल्बो ने ले लिया है। हाथ से बनी इस कंडेलो

के बी सी द्वारा पूजा सम्मान समारोह का किया गया आयोजन

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी केबिसी द्वारा दुर्गापुजा के अवस पर श्रेरूठ पुजा पंडज्ञल प्रतियोगिता का आयोजन कीया गया था। आज दिपावली मेले के दौश्रान इस पुजा पंडज्ञल प्रतियोगिता के विजेताओ के बिच

मध्य रात्री 12 बजे से महाकाली की उपासना प्रारंभ

दिपावली के दिन माता काली की भी पुजा की जाती है। कल ठिक मध्य रात्री केा माता काली की पुजा की जायेगी। काली पुजा को लेकर शहर के सभी काली मंदिरो को बडे ही सुंदर ढंग से सजाया औ संवारा गया है। माता काली की पुजा बडे ही विधि विधन के साथ की जाती है इसलिये शहर के सभी काली मंदिरो के पंडितो द्वारा सारी तैयारीयो को अंतिम रूप दिया जा रहा है। काली पुजा को लेकर शहर के कइ काली मंदिरो में विशेष मेले का भी आयोजन कीया जाता है। बिनोदपुर के मुख्य काली स्थान एंव तिगछिया काली मंदिर में लगने वाला मेला लेागो में काफी लेाकप्रिय हे। निगछिया का काली मेला तो छठ पुजा तक चलता है। काली पुजा को लेकर शहर में कइ भव्य पुजा पंड

दिवाली के साथ की जायेगी माता काली की पूजा

दिपावली के दिन माता काली की भी पुजा की जाती है। कल ठिक मध्य रात्री केा माता काली की पुजा की जायेगी। काली पुजा को लेकर शहर के सभी काली मंदिरो को बडे ही सुंदर ढंग से सजाया औ संवारा गया है। माता काली की पुजा बडे ही विधि विधन के साथ की जाती है इसलिये शहर के सभी काली मंदिरो के पंडितो द्वारा सारी तैयारीयो को अंतिम रूप दिया जा रहा है। काली पुजा को लेकर शहर के कइ काली मंदिरो में विशेष मेले का भी आयोजन कीया जाता है। बिनोदपुर के मुख्य काली स्थान एंव तिगछिया काली मंदिर में लगने वाला मेला लेागो में काफी लेाकप्रिय हे। निगछिया का काली मेला तो छठ पुजा तक चलता है। काली पुजा को लेकर शहर में कइ भव्य पुजा पंड

आगामी छठ को देखते हुए जिला प्रशासन की तैयारियां शुरू

दिवाली के बाद लेाकआस्था का महापर्व छठ पुजा मनाइ जायेगी। आमतौर पर दिपावली के छठे दिन पहला संध्या का अघ्र्यदान हेाता है लेकिन इसबार चतुर्थी तिथि के दो बार होने से इसबार दिवाली के सातवे दिन संध्या का अध्र्यदान हेागा। छठ पुजा का यह महापर्व अगामी 24 अक्टुबर से प्रारंभ हेागा। 24 अक्टुबर मंगलवार को नहाय खाय अर्थात कददु भात,

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